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प्रोफेसर हरी नरके का प्रथम विनम्र स्मरण दिल्ली।

प्रोफेसर हरी नरके का प्रथम विनम्र स्मरण दिल्ली।

विश्वभर में सामाजिक शैक्षणिक क्रांति के जनक महात्मा ज्योतिबा फुले, ज्ञान ज्योति सावित्रीबाई फुले के जीवन,उनके कार्यों के आदर्शों को लेकर प्रोफेसर हरी नरके ने अनुकरणीय साहित्य उपलब्ध कराया। नरके जी ने जन-जन को सादा जीवन उच्च विचार, और श्रद्धा, अंधभक्त अंधविश्वास, कुरीतियां,फिजूलखर्ची आदि पर जनमानस को अपने विचारों,वक्तव्यों,लेखनी से नई राह दिखाई। फुले आदर्शों को आगे बढ़ाने के लिए, आधुनिक संसाधनों का उपयोग का जो मार्ग महात्मा फूले दंपति ने अपनाया था।उनकी लिखी गई पुस्तकों को हिंदी, अंग्रेजी तथा अन्य भाषाओं में अनुवादक कर मूल साहित्य को जनमानस तक पहुंचा।

इसी के साथ खुले दंपति पर स्वयं ने अनेक किताबें लिखी। इसी प्रकार संविधान रचयिता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के ऊपर भी प्रोफेसर हरि नरके ने साहित्य जनमानस को उपलब्ध कराने में अनुकरणीय भूमिका निभाई। 9 अगस्त भारत छोड़ो दिवस के दिन समाज को जागृत करने वाले प्रोफेसर हरी नरके का प्रथम पुण्य स्मरण है ।

महात्मा फुले सामाजिक शिक्षण संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष गंगाराम गहलोत, पूर्व अध्यक्ष शंकरराव लिंगे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामलाल कच्छावा, महासचिव रामनारायण चौहान, कोषाध्यक्ष ग्यारसीलाल सैनी, संयुक्त सचिव रामप्रसाद सैनी, अनुभव चंदेल तथा पदाधिकारी एवं सदस्यों ने प्रोफेसर हरि नरके द्वारा बताएं आदर्श पर चलने का संकल्प लिया। इनके द्वारा लिखा साहित्य पढ़ने की अपील की। जय जोती,जय क्रांति।(रामनारायण चौहान) महासचिव दिनबंधू न्यूज शिवक्रांती टीव्ही संपादक सत्यशोधक शंकरराव लिंगे 73 87 37 78 01 मी ही नंबर आपके व्हाट्सअप ग्रुप मे ॲड करना है

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