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सामाजिक क्रांती के जनक युगपुरुष महात्मा फुले

सामाजिक क्रांती के जनक युगपुरुष महात्मा फुले क्रमशा शोषितों, दलितों, पीड़ितों, उपेक्षितों, तिरस्कृतों, बहिष्कृतों का जीवन सहनीय ही नहीं, सुखी बनाने का व्रत उन्होंने लिया था. उनका उद्धार याने क्रांति, अपना सारा जीवन उनके लिए फुलेजी ने समर्पित किया.

एक बात सचमुच चौंकानेवाली है. वह यह कि महात्मा फुले ने गरीब किसानों, खेत-मज़दूरों और उनकी दयनीय स्थिति का विचार बड़ी सूक्ष्मता से और सर्वागीण रूप से किया. कार्ल मार्क्स ने विश्व के मज़दूरों के उद्धार का उद्घोष किया. फुलेजी ने उसमें खेतिहरों के उद्धार को जोड़ दिया. खेतिहरों की सर्वांगीण उन्नति तथा नारी शिक्षा उनके समाजसुधार के मानबिंदु थे. शेतकऱ्याचा असूड’ पुस्तक के लेख पढ़ने पर पता चलता है कि उन्होंने किसान वर्ग का कितनी सूक्ष्मता से अध्ययन किया था. यह पुस्तक आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी साबित हो सकती है. इसमें उन्होंने न केवल किसान वर्ग की गिरती माली हालत का वर्णन किया है बल्कि उनमें सुधार लाने के लिए सरकार को कौन-कौन-से कठोर उपाय करने चाहिए, यह भी बताया है. “ पानी रोको, पानी सोखाओ” यह घोषणा हम आज देते हैं. यही घोषणा उन्होंने सन् 1883 में ही की है. एक स्थान पर वे कहते हैं, “हमारी उद्योगी सरकार को चाहिए कि काले-गोरे लष्कर के साथ पुलिस विभाग के फालतू सिपाहियों द्वारा जगह-जगह पर छोटे बाँध इस तरह से बनाए कि पूरवी वर्षा का पानी सारे खेत में जज्ब होने के बाद नदी-नाले में मिले ऐसा करने से खेत उपजाऊ हो जाएँगे. ”

उन्होंने सरकार को ये भी सुझाव दिये हैं कि किसानों को आधुनिक कृषि तंत्रज्ञान का लाभ दिलाया जाए, किसानों के बच्चों को अनिवार्य रूप से स्कूल भेजने का कानून बनाया जाए. ऐसी कई मिसालें दी जा सकती हैं.

केवल शाब्दिक उपाय सुझाकर वे नहीं रुके. उन्होंने सूखा-निवारण का काम किया. किसानों तथा खेतिहरों के संगठन बनाये, उनमें जागृति पैदा की. किसान बाँध का पानी ज़मीन को दे, इसलिए उन्होंने ‘मांजरी में जमीन खरीदकर खुद आधुनिक पद्धति की खेती कर दिखाई. कृषिमाल की विक्री के लिए दुकान खोली. निर्माण कार्य के ठेके लिये. साहुकारशाही के खिलाफ जंग लड़ी.

वे जानते थे कि ” सारा समाज उन्नति, अभ्युदय की क्षितिज की ओर अग्रसर होने के लिए शिक्षा की बुनियाद होना बहुत ज़रूरी है.” इसीलिए मेरे विचार से विद्यार्जन के लिए धर्म द्वारा लगाये गये निबंध तोड़कर नारियों और अछूतों के लिए शिक्षा के द्वार खोलनेवाले पहले भारतीय हैं-महात्मा जोतीराव फुले. दीनबंधू न्यूज संपादक सत्यशोधक शंकरराव लिंगे 73 87 37 78 01

(आठ)

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