24 सितंबर 1873 को महात्मा फुले ने सामाजिक शैक्षणिक क्रांति का आगाज किया सभी महापुरुष अपने वक्त के ऐसे आदर्श हुए हैं।

24 सितंबर 1873 को महात्मा फुले ने सामाजिक शैक्षणिक क्रांति का आगाज किया सभी महापुरुष अपने वक्त के ऐसे आदर्श हुए हैं। जिनके द्वारा कहे गए शब्दों एवं लिखित उल्लेख से वर्तमान मानव समाज पढ़,समझ कर अपने जीवन में उतारकर एक सुखमय,सादा जीवन_ उच्च विचार से आनंदित रह सकता है। इन्हीं में महात्मा ज्योतिबा फुले एक हैं। ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ। तत्कालीन समय में सामाजिक परिवेश इस प्रकार का रहा था कि, ज्योति राव को शिक्षित होने का भी अधिकार नहीं था। किंतु उनकी मौसी सुगना बाई एक अंग्रेज के यहां काम करती थी।
उन्होंने ज्योति राव को शिक्षित करने में अहम भूमिका निभाई। उनके पिता तो खुश नहीं थे, क्योंकि सामाजिक मान्यताओं में शिक्षा पाना अपराध मानते थे। ज्योति राव कड़ा परिश्रम कर निरंतर प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होते-होते कक्षा सातवीं उत्तीर्ण हो गए। जो आज के युग में ग्रेजुएशन के बराबर है। इस प्रकार ज्योति राव को शिक्षा मिली।वे मराठी और अंग्रेजी भाषा को अच्छी प्रकार समझ कर बोलते, लिखते थे। ज्योतिबा ने नारी उत्थान का भी एक अभियान अपने घर से चलाया। उनकी अनपढ़ पत्नी सावित्री को शिक्षित, प्रशिक्षित कर भारत की प्रथम शिक्षिका बनाकर नारी जगत को शिक्षा प्राप्त करने का आगाज कर दिया।
इसी प्रकार एक मुस्लिम महिला फातिमा बैग को भी शिक्षित कर उन्हें भी शिक्षिका बनाकर मुस्लिम समाज में भी नारी शिक्षा का सोपान खड़ा कर दिया। ज्योतिबा जैसे-जैसे समाज में घुलते मिलते रहे, वैसे-वैसे समाज को सुशिक्षित बनाने के लिए सदा निरंतर जुटे रहे। फुले जी की मान्यता थी, ईश्वर द्वारा प्रत्येक मानव को एक समान पढ़ने, लिखने, जीवन जीने, आचरण करने, खान-पान पहनाव का समान अवसर दिया। किंतु वर्णवादी व्यवस्था में शूद्र वर्ण को लगभग सभी मानवीय अधिकारों से निषेध कर रखा था। इस कारण शिक्षा केवल ब्राह्मण वर्ग ही प्राप्त करता था। किंतु इस परिवेश में भी ज्योति राव अपने स्वयं के प्रयासों से शिक्षित हुए थे।
उन्होंने समाज में सामाजिक, शैक्षणिक क्रांति के बीज बो कर संपूर्ण मानव समाज को प्रकृति द्वारा प्रदत सभी अधिकारों का उपभोग करने लायक बनाने की ठानी। अपने जीवन का उद्देश्य भी यही बना लिया। उन्होंने अश्प्रश्यता को मानव समाज में सबसे बड़ा कलंक माना। मनुष्य मनुष्य में अस्पृश्यता कैसे हो सकती है। यह ईश्वर की देन नहीं है। यह तो वर्णवादी व्यवस्था की देन है। अंधविश्वास,अंधश्रद्धा को मिटाने के लिए ज्योति राव निरंतर सभी तरह के प्रयास करते रहे। तत्कालीन परंपरा और पद्धतियों को भी वे बदलना चाहते थे। सभी मानव को एक जैसी पद्धति में जीने का अवसर प्रदान करने के पक्षधर थे। इन्ही परिवेश में 24 सितंबर 1873 को महात्मा ज्योतिबा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की। सत्यशोधक समाज की स्थापना के समय केवल 30_40 लोग ही उपस्थित थे।लेकिन फुलेजी ने जिन उद्देश्यों के लिए सत्यशोधक समाज की स्थापना की थी उन पर उन्होंने ही अमली जामा पहनाना प्रारंभ कर दिया था।
सत्यशोधक समाज के उद्देश्यों में सभी मानव को रोजगार मूलक निशुल्क शिक्षा शासन द्वारा दिए जाना।विधवा विवाह कराया जाना, विधवाओं की प्रसूति की व्यवस्था करना। अस्पृश्यता मिटाना। अंधविश्वास दूर करना। मानव को धर्मांधता से भ्रमित होने से जागरूक रखना। विवाह सादगी पूर्ण कम खर्चीला और सत्यशोधक रीति से करना। सत्यशोधक रीति से गृह प्रवेश आदि रीति-रिवाज को पूरा करना। मृत्यु भोज का निषेध करना। सामूहिक विवाह पद्धति अपनाना। ऐसे अनेक क्रांतिकारी कार्य सत्यशोधक समाज के माध्यम से होने लगे। जिससे सामाजिक क्रांति खड़ी हो गई। शिक्षा के क्षेत्र में भी सबको समान अवसर मिलने लगा। यह क्रांतिकारी बदलाव फुले दंपति का मानव समाज के लिए बहुत बड़ा उपकार है। जिसे अभी तक जगह-जगह अपनाया जा रहा है। मानव जीवन सुखमय आनंद पूर्वक जीवन व्यतीत करने लायक बनते जा रहे हैं।
सत्यशोधक आदर्श रीतियां यदि मानव समाज अपनाने लगे तो, अनेक चिताओं से मुक्त होकर अपनी आर्थिक स्थिति भी मजबूत रख सकता है। कर्जदार कभी नहीं हो सकता। अपने-अपने परिवार को सदा सुखी रख सकता है। आईये हम भी सत्यशोधक रीति पहले पढ़े,समझे, सुने फिर अपना कर आदर्श जीवन जिएं। आगे बढ़े और समाज को भी उसी आधार पर आगे बढ़ाए। यह सामाजिक संगठनों का दायित्व है कि वह अपने-अपने स्थान पर महात्मा फुले द्वारा स्थापित सत्यशोधक समाज की परंपरा को आगे बढ़ाएं और सुख में जीवन व्यतीत करने का मार्ग प्रशस्त करें। 24 सितंबर सत्यशोधक समाज का स्थापना दिवस है।जिसे जगह-जगह मनाकर मानव समाज को जागरूक करने में तत्पर रहे। संस्थाओं का यह कार्य सदा स्मरणीय रहेगा। जय ज्योति, जय क्रांति। (रामनारायण चौहान) महासचिव। महात्मा फुले सामाजिक शिक्षण संस्थान। दिल्ली दीनबंधू न्यूज शिवक्रांती टीवी संपादक सत्यशोधक शंकरराव लिंगे 73 87 37 78 01 नंबर व्हाट्सअप ग्रुप मे ऍड करो




