सोशल
महात्मा ज्योतिबा फुले

*महात्मा ज्योतिबा फुले* +हंटर आयोग+ 409. ज्योतिबा स्पष्टतया जानते थे कि यहां के जटिल सामाजिक जीवन में सदियों की दास्तां और व्यापक गरीबी, धार्मिक कट्टरता, जाती पाती, संप्रदायवाद और छुआछूत की भावना से दलित और मेहनतकश जातियों में शिक्षानुराग की मूल कल्पना को ही मृत प्राय बना डाला है। न उनमें कोई चेतन है ना उनमें उत्साह। जब तक उनमें सामाजिक और आर्थिक क्रांति नहीं आती, वे शिक्षा के प्रति उदासीन ही बने रहेंगे। #नशा,छोड़ें। सत्यशोधक दिन बंधू संपादक शंकरराव लिंगे 73 87 37 78 01

[gspeech-button]



