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सत्यमेव जयते”भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक *महात्मा ज्योतिबा फुले

“सत्यमेव जयते”भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक *महात्मा ज्योतिबा फुले* के अंश।लेखक कन्हैयालाल चंचरिक +दलितों के मुक्तिदाता+ 282.ज्योतिबा अपने ढंग से उपेक्षितों, अधिकार वंचित दलित और गरीबों को जागना चाहते थे। वे सामाजिक व्यवस्था में आमूल परिवर्तन के इच्छुक थे।इसलिए आजन्म जूझते रहे।

उन दिनों महाराष्ट्र और पुणे में परमहंस सभा और प्रार्थना सभा जैसे ईश्वर वादी और अध्यात्म वादी नौकरी पैसा लोगों की संख्या से बोझिल संगठन थे। जो समाज सुधार की बात तो करते थे। कुछ आश्रम, आनाथालय,स्कूल भी खोल देते थे। लेकिन उपेक्षितों, अधिकार वंचितों औरअष्प्रश्यो में घुलमिलकर,

उनके मध्य रहकर काम करने से कतराते थे। ज्योतिबा उन्हीं के मध्य पैदा हुए। उन्ही के मध्य अपना कार्य क्षेत्र बढ़ाया। महाराष्ट्र में पेशवाओं के अंत के बाद ही दलित जातियों में चेतना आ गई थी। उनके समस्त श्रेय ज्योतिबा और उनके सहयोगियों को जाता है। वैसे 1852 में सामंत, जागीरदारों, युवा देशभक्तों ने दक्कन संगठन की स्थापना की।

लेकिन यह संगठन सामाजिक ना होकर राजनीतिक अधिक था। वह जनता की भलाई कम, अपने खोए वैभव और हैसियत, पाने को अधिक महत्व देता था। इसलिए यह संगठन चल नहीं पाया। इस प्रकार 1867 में पूना असोसिएशन और 3 वर्ष बाद 1870 में सार्वजनिक सभा बनी। दक्कन संगठन के सदस्यों ने ही सार्वजनिक सभा का निर्माण किया था। बाद में सब आदर्शवादी संगठन बने रहे। निरंतर।#नशा,छोड़ें। सत्यशोधक दिन बंधू न्यूज संपादक शंकरराव लिंगे 73 87 37 78 01

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