“सत्यमेव जयते
“सत्यमेव जयते” भारत सरकार द्वारा प्रकाशित पुस्तक महात्मा ज्योतिबा फुले के अंश। लेखक कन्हैयालाल चंचरिक +दलितों के मुक्तिदाता + 307. उन्होंने कहा कि शुद्र और अतिशूद्र एक ही वंश एक ही मूल के निवासी हैं। क्योंकि वे प्रारंभ से ही ब्राह्मण, आधिपत्य के विरुद्ध थे। इसलिए उन्हें दस्यु, असुर, राक्षक और महार की संख्या दी गई। उन्होंने कहा चतुर और बलशाली ब्राह्मणों ने स्वयं को देवता की संज्ञा दी। शूद्रों को परस्पर स्पर्श करने पर पाबंदी भी लगाई तथा उनमें बड़ी चतुराई से विभाजन रेखा खींच दी। उन पर सदियों से होने वाले शोषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शुद्र की आजीविका के या तो साधन श्रोत सीमित या फिर छीन लिए गए थे। उन्हें मृत पशुओं का मांस भक्षण करने के लिए विवश होना पड़ा। बस्तियों से दूर रहने के लिए बाध्य होना पड़ा। यही नहीं भोजन और पीने के पानी तक के लिए ऊंची जातियों से भीख मांगना पड़ती थी। निरंतर। #नशा,छोड़ें।




